धर्म रक्षा संघ

।। धर्मो रक्षति रक्षितः ।।

धर्म रक्षा संघ

सेवा. संस्कार. समर्पण.

धर्म की रक्षा, राष्ट्र की सेवा, समाज का उत्थान

हिन्दवः सोदराः सर्वे, न हिंदुः पतितो भवेत्।
मम दीक्षा धर्म रक्षा, मम मन्त्रः समानता॥

अर्थात् - सब हिन्दू भारत माँ की सन्तान होने से सहोदर हैं, भाई हैं। इसलिए कोई हिन्दू अछूत नहीं हो सकता। हमने ‘समानता’ का मन्त्र लेकर “धर्म-रक्षा” की दीक्षा ली है।

समाज को धर्म पूर्वक जोड़कर सनातन-संस्कारों का संरक्षण करना आज की महती आवश्यकता है। हमारा राष्ट्र 'भारतवर्ष' अखंड हिंदू राष्ट्र बन कर पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो एवं श्रीरामजन्मभूमि की भांति श्रीकृष्ण जन्मभूमि भी अपने गौरवशाली रूप में स्थापित हो। धर्म रक्षा संघ के इस पावन प्रयास में आइए, हम सब एकजुट होकर तन-मन-धन से संकल्प पूर्वक प्रस्तुत हों।

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धर्म रक्षा संघ

आइए, धर्म रक्षा के इस महायज्ञ में सहभागी बनें।

सेवा ही साधना है, समर्पण ही पूजा है।